प्रेम और स्वतंत्रता



                      🕊️"प्रेम" और "स्वतंत्रता"🕊️ 


शब्दों के जोड़े के रूप में चित्र के साथ प्रतीत होता केवल सामान्य सा उद्धरण मात्र, जो प्रश्नचिन्ह के अभाव में किसी भी प्रकार के प्रश्न की मांग करता नहीं दिखता, लेकिन उद्धरण से इतर होकर शब्दों की गहराई में जाने पर दोनों शब्दों को अंतरसम्बद्ध करने के पश्चात्, चित्त में जो दार्शनिक भाव उत्पन्न होगा, वो स्वतः उद्धरण के गौण रूप में छिपी प्रश्नवाचक प्रवृत्ति को उजागर कर देगा, जो उस प्रकार से उलझाने के लिए पर्याप्त है, जिस प्रकार आज अधिकतर लोग पहले मुर्गी आई या अंडा के प्रश्न पर उलझे हुए हैं।



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