An honour to the legend in my words (हिन्दी में)
An honour to the legend in my words
डॉक्टर मेहराज सर (गुरुदेव) को समर्पित 🙏💐
मैं लिख रहा हूं क्योंकी मैं बोल नहीं पाया और बोल पाता तो लिखता ही क्यों, आप पढ़ लीजिएगा क्योंकि आपने सुना नहीं और सुन लेते तो पढ़ते ही क्यों- यार आज थोड़ा सा कामकाज में क्या व्यस्त हुआ सभी ने सोचा मैं निष्क्रिय ही हो गया😂
12 दिसंबर को मैंने एनसीईआरटी को बतौर हिंदी कंटेंट डेवलपर के तौर पर ज्वाइन किया था, किसी भी प्रकार के सरकारी संस्थान का यह मेरा पहला अनुभव था, जब मैं आया तो शुरू के दो से तीन दिन मेहराज सर के इंतज़ार में ही गुज़रे क्योंकि गुरुदेव छुट्टी पर थे, वो तो छुट्टी पर थे, लेकिन मैं बेचैन, मैं सीखना और मिलना चाहता था कि आख़िर कौन हैं मेहराज सर? जिनकी इतनी पूछ है, एक हमारी ही सहकर्मी ma'am से शुरु में बहुत पूछा, ma'am ये कैसे, वो कैसे, मेहराज सर के आने तक सहकर्मी ma'am ने बहुत साथ दिया, शुरू में धारणा बना ली कि मेहराज सर कोई एकदम सूट बूट में प्रोफेशनल टाइप होंगे, और लगभग तीन दिन के इंतज़ार के बाद उम्मीद से इतर एक सादा व्यक्तित्व वाला शख्स चेयर पर बैठा दिखता है और पता चलता है कि यही मेहराज सर हैं और यही इस लैब में मेरे सीनियर हैं, मेरी एक आदत है मैं सीखने के लिए हमेशा बच्चा बन जाता हूं और बड़ा बनकर आप सीख भी कैसे सकते हैं, एक दिन हिंदी में कुछ गलती पकड़ में आई तो मैं बहस कर बैठा, मेहराज सर ने कहा सर आप मुझसे बेहतर हैं, गुरुदेव ये आपका बड़प्पन और मेरा सौभाग्य है कि आपने हमेशा मुझे सर कहा, नहीं तो मेरी इतनी हैसियत कहां, मेरा अहम मुझ पर हावी हो गया था, बाद में पता चला गलत मैं था उस वाक्य में आपका संदर्भ बिल्कुल ठीक था, शुरू में नोंक झोंक खींच तान तकरार सब चला लेकिन ये सब वहीं चलता है जहां प्यार होता है, जहां प्यार होगा ही नहीं वहां संवादहीनता होगी, मैंने मीडिया स्टडीज में पढ़ा था की सबसे बड़ी सज़ा है संवाद हीनता संभवतः कालापानी का कारण भी यही था, अब मुझ पर कोई ये लागू मत कर देना भई, मुझे आज भी वो दिन याद है, जिस दिन मैंने ठंड में रात भर ट्रांसलेशन के लगभग 60 पन्ने एक एक शब्द चेक किए थे और जब ठंड के कारण तबियत बिगड़ने लगी तो ma'am ने टेलीग्राम पर कहा mehraj can join और simultaneously पन्ने फटाफट scroll होने लग गए उस समय मैंने कहा yes he has joined, और मुझे एक फिल्म का सीन याद आया जो मैंने 2008/9 में आई पिक्चर चक दे इंडिया में देखा था दरअसल उसमें एक नायिका बिंदिया नायक नाम के किरदार में होती है, जब वो हॉकी वर्ल्ड कप फाइनल में शिद्दत के साथ उतरती है तो बाज़ी पलट जाती और सालों बाद भारत मैच जीत जाता है। मेहराज सर का किरदार हिन्दी संवर्ग में वैसा ही है, 100 सुदेश आयेंगे और चले जाएंगे, मेहराज jpf आया था consultant जा रहा है और अगली बार प्रोफेसर बनकर आएगा, आप साहित्य के ज्ञाता हैं इसमें कोई शक नहीं है, आप जहां जायेंगे कमाल करेंगे, आपकी अनुपस्थिति में हिंदी का दारोमदार मेरे कंधों पर होगा हां कितने दिन होगा ये मैं भी नहीं जानता लेकिन जितने भी दिन होगा इसे पूरी शिद्दत से करूंगा, लिखना मेरा शौक है, लिखे बिना मैं सोता नहीं, लेकिन आज तक इस ग्रुप में किसी के आने जाने पर इतना लंबाचौड़ा लेख नहीं लिखा इसके पीछे की वजह यही रही की इतना लंबा इंटरेक्शन भी किसी से नहीं रहा, और न ही कोई हिंदी से रहा, जो उसके मर्म को समझ सके,और अगर ये जुगलबंदी कुछ और समय तक, हम ही रहती तो शायद आने वाले समय में मैं ख़ुद को शून्य भी नहीं समझता, किसी ने कहा नज़र उतारो भई, इस जोड़े की, तो आज किसी ने आपको मेरा दोस्त कह दिया,आप 33 के हैं तो मैं 32 का हां मैं आपका दोस्त तो बनाना पसंद करूंगा लेकिन मेरी मजबूरी समझिए फिर मैं आपसे सीखूंगा कैसे क्योंकि अगर मैंने आपमें एक दोस्त ढूंढ लिया तो मैं आपको गुरूदेव कहना छोड़ दूंगा, जबकि मैं आपको आज से ही गुरूदेव कहने की शुरुआत कर चुका हूं, जितने भी दिन बीते हमेशा उन दिनों को याद रखूंगा,आप बेहतर नहीं बेहतरीन हैं, लोग मुझे अक्सर कहते हैं आपकी हिंदी अच्छी है लेकिन शेर को सवा शेर नहीं बब्बर शेर मिल ही गया, आप एनसीईआरटी के कैलेंडर समेत दोस्तों, प्रोफेसर्स समेत मेरी भी स्मृति में हमेशा हमेशा के लिए अंकित हो गए, और एक अमिट छाप छोड़ गए, मिलते रहेंगे सर, भविष्य के लिए शुभकामनाएं, Dr. मेहराज अली सर 🙏💐❤️🙋✌️🤘
heart melting words 💝👌
ReplyDeleteबहुत शुक्रिया आपका मान्यवर 🙏
DeleteThankyou so much 😇🙏
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