तुम, मैं और यादें


किसी ने सच ही कहा है अगर किसी सही शख़्स से हो जाए, तो मुहब्बत बहुत कमाल की चीज़ है, ये न जाति देखी है न मज़हब, न अमीरी देखती है न ग़रीबी, ऊंच नीच का ये फ़र्क कहां देखती है ये तो उमर का रोग है जो महज़ नज़र से हो जाता है, ज़िन्दगी के अतीत के चंद हसीं पन्ने पलटने के बाद सुकून के कुछ पलों को याद कर एक अजीब सा मीठा मीठा एहसास आज भी महसूस होता है, जैसे इश्क़ इत्र आज भी तुम्हारी यादों की झुरमुट में महक रहा हो, किसी ने सच ही कहा है मुहब्बत वो एहसास है जो फिज़ाओं को सालों साल अपनी महक से गुलज़ार रख सकता है, किसी को छुए बिना उसकी रूह को छू लेना भी इश्क़ है, ये यादें और एहसास ही तो है जो आँखों में आसूं के साथ साथ होठों पर हँसी भी ला देने की कुव्वत रखती है, कौन सही कौन गलत, क्या सही क्या ग़लत इस बात की उलझन और पेचीदगी से दूर बस उस पाक मुहब्बत को जीना और उसमें डूब जाना ही मुहब्बत की खूबसूरती है, क्या फ़र्क पड़ता है कि आज हम कहां तुम कहां बस चंद यादें, वो हसीं पल, तुम्हारी और मेरी बातें, तुम्हारी अदाएं और तुम्हारी हर इक अदा पर मेरी शायरी वाकई वो पल बेहद दिलकश और खुशनुमा रहा होगा जब मैं तेरा और तू मेरा रहा होगा

Comments

  1. Bhot pyaari or gheri anubhuti k sabd apne likhe h bhai ❤️

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